ईंटें मनके तथा अस्थियाँ नोट्स | Bihar Board Class 12th History Chapter 1 Notes | Harappa Civilization Notes & Free PDF

भारत की प्राचीन सभ्यताओं में सबसे प्रसिद्ध हड़प्पा सभ्यता (Harappa Civilization) हमारे इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। इस अध्याय “ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ” में हम हड़प्पा नगरों की संरचना, व्यापार, जीवनशैली और संस्कृति के बारे में विस्तार से जानेंगे।

यहाँ दिए गए Class 12th History Chapter 1 Notes विशेष रूप से Bihar Board Class 12th History Notes के विद्यार्थियों के लिए तैयार किए गए हैं, ताकि वे परीक्षा की तैयारी आसानी से कर सकें। नीचे दिए गए नोट्स और Free PDF से आप पूरा पाठ संक्षेप में समझ सकते हैं।

Bihar Board Class 12th History Chapter 1 Notes (Harappa Civilization Notes)

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ईंटें मनके तथा अस्थियाँ नोट्स | Class 12th History Chapter 1 Notes (Bihar Board)

ईंटें मनके तथा अस्थियाँ अध्याय Bihar Board Class 12th History Chapter 1 का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहाँ आपको Harappa Civilization Notes सरल भाषा में मिलेंगे। ये Class 12th History Notes आपकी परीक्षा तैयारी में मदद करेंगे, साथ ही Free PDF डाउनलोड करने का विकल्प भी उपलब्ध है।

यह अध्याय सिंधु घाटी सभ्यता पर केंद्रित है, जिसे हड़प्पा संस्कृति भी कहा जाता है। यह भारतीय उपमहाद्वीप की पहली ज्ञात नगरीय सभ्यता थी, जो लगभग 2600 ईसा पूर्व से 1900 ईसा पूर्व के बीच विकसित हुई। पुरातात्विकों को इस सभ्यता के बारे में जानकारी इसके पीछे छोड़े गए भौतिक साक्ष्यों जैसे मुहरों, आवासों, मृदभांडों, आभूषणों और औजारों के माध्यम से मिलती है, क्योंकि इसकी लिपि को अभी तक पढ़ा नहीं जा सका है।

  • संस्कृति शब्द का प्रयोग :
  • पुरातत्वविद ‘संस्कृति’ शब्द का प्रयोग पुरावस्तुओं के ऐसे समूह के लिए करते हैं जो एक विशिष्ट शैली के होते हैं और एक विशेष भौगोलिक क्षेत्र तथा काल-खंड से संबद्ध होते हैं।
    • हड़प्पा सभ्यता की विशिष्ट पुरावस्तुओं में मुहरें, मनके, बाट, पत्थर के फलक और पकी हुई ईंटें शामिल हैं।
  • नामकरण :
  • इस सभ्यता का नामकरण उस पहले खोजे गए स्थल ‘हड़प्पा’ के नाम पर किया गया, जहाँ ये पुरावस्तुएँ पहली बार मिली थीं।
  • काल निर्धारण :
  • इस सभ्यता का काल मोटे तौर पर 2600 ईसा पूर्व से 1900 ईसा पूर्व के बीच निर्धारित किया गया है। इससे पहले और बाद की संस्कृतियों को क्रमशः आरंभिक हड़प्पा और परवर्ती हड़प्पा कहा जाता है।
  • भौगोलिक विस्तार :
  • यह सभ्यता अफगानिस्तान, जम्मू, बलूचिस्तान (पाकिस्तान) और गुजरात जैसे दूर-दराज के क्षेत्रों तक फैली हुई थी।

हड़प्पा के लोग अपने निर्वाह (जीवन-यापन) के लिए विभिन्न तरीकों पर निर्भर थे।

  1. कृषि :
  • हड़प्पाई लोग कई तरह के अनाज उगाते थे, जिनमें गेहूँ, जौ, दालें, सफेद चना और तिल शामिल थे।
    • गुजरात के स्थलों से बाजरे के दाने भी मिले हैं।
    • चावल के दाने अपेक्षाकृत कम पाए गए हैं।
  • पशुपालन :
    • वे भेड़, बकरी, भैंस तथा सूअर जैसे जानवरों को पालते थे।
    • पुराविदों को इन जानवरों की हड्डियाँ मिली हैं, जिनसे उनके पालतू होने का प्रमाण मिलता है।
  • कृषि प्रौद्योगिकी :
  • हल का प्रयोग: पुराविदों को यह जानने के लिए मुश्किल हुई कि हड़प्पावासी खेती के लिए किस तकनीक का प्रयोग करते थे।
    • जुते हुए खेत : कालीबंगन (राजस्थान) नामक स्थल पर जुते हुए खेत के साक्ष्य मिले हैं, जिससे पता चलता है कि वे खेतों को जोतने के लिए हल का उपयोग करते थे।
    • सिंचाई : संभवतः उन्होंने नहरों और कुओं का उपयोग सिंचाई के लिए किया होगा। अफगानिस्तान में शोर्तुघई नामक हड़प्पा स्थल से नहरों के अवशेष मिले हैं।

मोहनजोदड़ो हड़प्पा सभ्यता का सबसे प्रसिद्ध स्थल है, जो सुनियोजित शहरीकरण को दर्शाता है।

  1. बस्तियों का विभाजन :
  • हड़प्पा और मोहनजोदड़ो जैसी बस्तियाँ मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित थीं:
    • (1.) दुर्ग (Citadel): यह छोटा लेकिन ऊँचाई पर बना होता था। इसका प्रयोग सार्वजनिक उद्देश्य वाले विशिष्ट ढाँचों के लिए किया जाता था।
    • (2.) निचला शहर (Lower Town): यह काफी बड़ा था, लेकिन नीचाई पर बना होता था। यहाँ सामान्य लोग रहते थे।
  • सुनियोजित निर्माण :
    • चबूतरे: शहर के सभी भवन पहले चबूतरे पर बनाए जाते थे, जिसका मतलब था कि पहले बस्ती का नियोजन किया गया और फिर निर्माण शुरू हुआ।
    • ईंटों का प्रयोग: धूप में सुखाई गई या भट्ठे में पकाई गई ईंटों का उपयोग किया जाता था। सभी ईंटें एक निश्चित अनुपात की होती थीं, चाहे वे किसी भी हड़प्पा स्थल से मिली हों (लंबाई, चौड़ाई, ऊँचाई का अनुपात 4:2:1)।
  • जल निकासी प्रणाली (Drainage System) : ईंटें मनके तथा अस्थियाँ
  • हड़प्पा शहरों की सबसे विशिष्ट विशेषता यहाँ की सुनियोजित जल निकासी प्रणाली थी।
    • पहले गलियों और नालियों को बनाया गया, फिर उनके किनारे आवासों का निर्माण किया गया।
    • प्रत्येक घर की नाली को गली की नाली से जोड़ा जाता था, और गलियों की नालियाँ मुख्य नालियों में मिलती थीं।
  1. आवासीय भवन (निचला शहर) :
  • आँगन पर केंद्रित: घरों के बीच में एक आँगन होता था, जिसके चारों ओर कमरे बने होते थे। आँगन खाना पकाने और कताई जैसी गतिविधियों का केंद्र था।
    • गोपनीयता पर ज़ोर: ज़मीन की सतह पर बनी दीवारों में खिड़कियाँ नहीं थीं। मुख्य द्वार से सीधा आंतरिक भाग या आँगन का दृश्य दिखाई नहीं देता था, जो गोपनीयता (Privacy) के महत्व को दर्शाता है।
    • स्नानागार: लगभग हर घर में एक निजी स्नानागार होता था, जिसकी नालियाँ दीवार के माध्यम से गली की नाली से जुड़ी होती थीं।
    • सीढ़ियाँ: कुछ घरों में ऊपर की मंजिल या छत तक जाने के लिए सीढ़ियों के अवशेष भी मिले हैं।
  • दुर्ग पर मिले विशेष भवन :
  • (1.) विशाल स्नानागार (Great Bath) : यह दुर्ग का एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक ढाँचा था।
    • यह एक विशाल जलाशय था जो चारों ओर से गलियारों से घिरा हुआ था।इसके तल तक जाने के लिए उत्तर और दक्षिण में सीढ़ियाँ बनी थीं।
    • इसका उपयोग किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान या समारोह के लिए किया जाता होगा।
  • (2.) मालगोदाम (Warehouse) : यह एक विशाल संरचना थी जिसके केवल निचले हिस्से (ईंटों के) ही बचे हैं। यह संभवतः अनाज या अन्य वस्तुओं के भंडारण के लिए इस्तेमाल होता था।

पुरातत्वविद सामाजिक भिन्नताओं (Socio-Economic Differences) का पता लगाने के लिए मुख्य रूप से दो विधियों का उपयोग करते हैं:

  1. शवाधान (Burials) :
  • गड्ढे: मृतकों को गड्ढों में दफनाया जाता था।
    • वस्तुओं की उपस्थिति: कुछ कब्रों में मृदभांड और आभूषण मिले हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि हड़प्पावासी पुनर्जन्म या मृत्यु के बाद के जीवन में विश्वास करते थे।
    • भिन्नता: कुछ कब्रों में तांबे के दर्पण या शंख के मनके जैसी वस्तुएँ मिली हैं, जबकि अन्य में नहीं, जिससे सामाजिक भिन्नता का संकेत मिलता है।
  • विलासिता की वस्तुओं की खोज :
  • पुराविदों ने वस्तुओं को दो श्रेणियों में बाँटा: रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुएँ (जैसे चक्की, मृदभांड) और विलासिता की वस्तुएँ।
    • विलासिता की वस्तुएँ: ये दुर्लभ होती थीं, महँगी सामग्री से बनी होती थीं, और अक्सर मोहनजोदड़ो तथा हड़प्पा जैसी बड़ी बस्तियों में केंद्रित थीं। जैसे – फ़ायस (बालू और रंगीन गोंद का मिश्रण) से बने छोटे बर्तन।

चन्हुदड़ो (मोहनजोदड़ो से 125 हेक्टेयर छोटा) शिल्प उत्पादन का एक महत्वपूर्ण केंद्र था।

  1. शिल्प के प्रकार :
  • मनके बनाना, शंख की कटाई, मुहर बनाना, बाट बनाना, और धातु कर्म।
  • मनके बनाने में प्रयुक्त सामग्री :
  • कार्नेलियन (लाल रंग का सुंदर पत्थर), जैस्पर, स्फटिक, क्वार्ट्ज, सेलखड़ी, तांबा, काँसा, सोना और शंख।
  • उत्पादन की पहचान :
  • कारीगरों द्वारा उपयोग किए जाने वाले उपकरण (उपकरण), कच्चा माल, अधूरे उत्पाद और त्यागा गया माल, उत्पादन केंद्रों की पहचान में मदद करते हैं।
  1. मुहरें और मुद्रांकन (Seals and Sealings) :
  • सामग्री: मुहरें आमतौर पर सेलखड़ी नामक पत्थर से बनी होती थीं।
    • विशेषता: मुहरों पर जानवरों के चित्र और एक अज्ञात लिपि के चिह्न उत्कीर्ण होते थे।
    • उपयोग: मुहरों का उपयोग लंबी दूरी के संचार को वैधता देने के लिए किया जाता होगा (जैसे सामान से भरे बोरे को धागे से बाँधकर उस पर मुहर लगाई जाती थी)।
  • हड़प्पाई लिपि :
  • यह लिपि एक रहस्यमयी लिपि है, क्योंकि इसे अभी तक पढ़ा नहीं जा सका है।
    • यह लिपि संभवतः दाएँ से बाएँ लिखी जाती थी।
    • इसमें लगभग 375 से 400 तक चिह्न हैं, जो इसे वर्णमाला (Alphabetical) के बजाय चित्रात्मक (Pictographic) लिपि बनाते हैं।
  • बाट (Weights) :
  • विनिमय (Exchange) को नियंत्रित करने के लिए बाटों की एक सटीक प्रणाली थी।
    • ये बाट आमतौर पर चर्ट नामक पत्थर से बनाए जाते थे।
    • ये बाट घनाकार होते थे और इन पर कोई निशान नहीं होता था।
    • निचले मानदंड द्विआधारी (1, 2, 4, 8, 16, 32…) थे, जबकि उच्च मानदंड दशमलव प्रणाली का अनुसरण करते थे।

लगभग 1800 ईसा पूर्व के बाद सिंधु घाटी सभ्यता का पतन हो गया, जिसके कारणों पर इतिहासकारों में मतभेद है।

  1. पतन के संकेत (Signs of Decline):
  • बस्तियों का सिकुड़ना और परवर्ती हड़प्पा स्थलों का ग्रामीण क्षेत्रों की ओर पलायन।
    • बाटों, मुहरों और विशिष्ट मनकों जैसी हड़प्पा संस्कृति की विशिष्ट पुरावस्तुओं का समाप्त हो जाना।
    • लेखन, लंबी दूरी के व्यापार और विशिष्ट शिल्प कला का अंत।
  • पतन के संभावित कारण :
  • (1.) जलवायु परिवर्तन: अत्यधिक वर्षा का कम होना या सूखा पड़ना।
    • (2.) नदियों का सूखना/मार्ग बदलना: सिंधु नदी की सहायक नदियों का सूख जाना या उनका मार्ग बदल लेना।
    • (3.) अत्यधिक वनों की कटाई: ईंधन के लिए या ईंटें पकाने के लिए वनों का विनाश।
    • (4.) बाढ़: अत्यधिक बाढ़ के कारण कृषि और नगरों का विनाश।
    • (5.) बाहरी आक्रमण (आर्यों का आक्रमण – पुराना मत): यह सिद्धांत अब विवादित है, लेकिन कुछ पुरातत्वविदों ने आक्रमण को एक कारण माना था।

ईंटें मनके तथा अस्थियाँ (हड़प्पा सभ्यता) का पतन का कारण कोई एक कारक नहीं था, बल्कि कई कारकों के संयोजन को माना जाता है, जिससे सभ्यता की जीवन रेखा (कृषि और व्यापार) कमजोर हो गई।

ईंटें मनके तथा अस्थियाँ -हड़प्पा सभ्यता (Harappa Civilization Notes) – FAQ ❓

प्रश्न 1. हड़प्पा सभ्यता को “सिंधु घाटी सभ्यता” क्यों कहा जाता है?

उत्तर : हड़प्पा सभ्यता का विकास सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के किनारे हुआ था। इसी कारण इतिहासकारों ने इसे “सिंधु घाटी सभ्यता” कहा है। यह भारतीय उपमहाद्वीप की प्रथम नगरीय संस्कृति मानी जाती है।

प्रश्न 2. ईंटें मनके तथा अस्थियाँ अध्याय का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर : “ईंटें मनके तथा अस्थियाँ” अध्याय का उद्देश्य विद्यार्थियों को Harappa Civilization Notes के माध्यम से हड़प्पा सभ्यता की शहरी योजना, जीवनशैली और सांस्कृतिक विविधता को समझाना है। यह Bihar Board Class 12th History Chapter 1 Notes का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी है।

प्रश्न 3. हड़प्पा सभ्यता के लोग अपने निर्वाह के लिए किन साधनों पर निर्भर थे?

उत्तर : हड़प्पाई लोग मुख्यतः कृषि, पशुपालन, व्यापार और शिल्पकला पर निर्भर थे। वे गेहूँ, जौ और दालें उगाते थे तथा भेड़, बकरी, बैल और भैंस जैसे पशु पालते थे। गुजरात और राजस्थान के स्थलों पर उनके खेती के प्रमाण भी मिले हैं।

प्रश्न 4. Class 12th History Notes में हड़प्पा सभ्यता का अध्ययन क्यों आवश्यक है?

उत्तर : Class 12th History Notes का यह अध्याय विद्यार्थियों को भारत की सबसे प्राचीन शहरी संस्कृति — हड़प्पा सभ्यता (Harappa Civilization) — से परिचित कराता है। ईंटें मनके तथा अस्थियाँ के माध्यम से विद्यार्थी सभ्यता की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संरचना का गहन अध्ययन कर सकते हैं।

प्रश्न 5. ईंटें मनके तथा अस्थियाँ Notes PDF कैसे डाउनलोड करें?

उत्तर : विद्यार्थी Bihar Board Class 12th History Chapter 1 – ईंटें मनके तथा अस्थियाँ Notes PDF को आसानी से BiharBoardQuestionBank.Com वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं। वहाँ आपको Harappa Civilization Notes, Class 12th History Notes, और अन्य सभी अध्यायों के Free PDF Download लिंक एक ही जगह पर उपलब्ध हैं — जिससे परीक्षा की तैयारी सरल और प्रभावी बनती है।

Harappa Civilization Notes PDF Download Link

आप नीचे दिए गए लिंक से Bihar Board Class 12th History Chapter 1 Notes PDF Free में डाउनलोड कर सकते हैं।

📘 Bihar Board Class 12th History Chapter 1 Notes – Free PDF Download

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ईंटें मनके तथा अस्थियाँ अध्याय हमें हड़प्पा सभ्यता (Harappa Civilization) की उन्नत शहरी योजना, तकनीकी कौशल और सांस्कृतिक विविधता का सजीव चित्र प्रस्तुत करता है। यह स्पष्ट होता है कि Bihar Board Class 12th History Chapter 1 Notes न केवल परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि भारत की प्राचीन सभ्यता को समझने का भी श्रेष्ठ माध्यम हैं। इन Class 12th History Notes के माध्यम से विद्यार्थी यह जान सकते हैं कि हड़प्पा सभ्यता मानव सभ्यता के विकास की एक सुनियोजित और सुसंस्कृत शुरुआत थी, जो आज भी अध्ययन का प्रमुख विषय बनी हुई है।

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